दिल्ली के बाजारों में भीड़ उमड़ी, लेकिन मरकज के नाम से लोगों में अब भी कोरोना का खौफ

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निजामुद्दीन के मशहूर गालिब कबाब कॉर्नर पर फिर से रौनक लौटने लगी है। तंदूर से उठती भुने हुए गोश्त की खुशबू खाने के शौकीनों को एक बार फिर निजामुद्दीन की गलियों तक खींच लाई है। देशी-विदेशी इत्र की दुकानें एक बार फिर सजने लगी हैं। निजामुद्दीन औलिया की दरगाह पर चढ़ने वाले ताजे फूल फिर महकने लगे हैं। मशहूर कव्वाली एक बार फिर यहां की शामों में संगीत घोलने लगी हैं।

इस सबके बावजूद निजामुद्दीन की वो शान-ओ-शौकत नहीं लौट पाई है, जो कोरोना संक्रमण से पहले हुआ करती थी। न ही इस इलाके में वैसी भीड़ नजर आती है, जैसी दिल्ली के दूसरे इलाकों और बाजारों में उमड़ रही है। कोरोना संक्रमण के शुरुआती दौर में निजामुद्दीन मरकज जिस तरह से चर्चा में आया था, उसका असर आज भी यहां दिखता है।

निजामुद्दीन मरकज, जिसे बंगलेवाली मस्जिद भी कहा जाता है, उस पर आज भी ताले लटके नजर आते है। हालांकि, प्रबंधन के लोगों ने इसमें नमाज पढ़ने की व्यवस्था शुरू कर दी है। लेकिन, आम लोगों और बाहरी जमातों का यहां आना अब भी बंद है।

मरकज के बाहर खजूर का व्यापार करने वाले मोहम्मद शाकिर कहते हैं, ‘मरकज वाली घटना के बाद निजामुद्दीन ऐसा हो गया कि लोग यहां आने से बच रहे हैं। पहले यहां सभी धर्मों के लोग आया करते थे। लेकिन, इन दिनों गैर-मुस्लिम यहां मुश्किल से ही आते हैं।’

निजामुद्दीन के मशहूर गालिब कबाब कॉर्नर पर फिर से थोड़ी-थोड़ी रौनक लौटने लगी है।

जब देश के तमाम मंदिर-मस्जिद आम लोगों के लिए खोल दिए गए हैं, तो निजामुद्दीन मरकज बंद क्यों है? यह सवाल पूछने पर मरकज के चौकीदार कहते हैं- मरकज आम मस्जिदों से अलग है। मस्जिदों में लोग नमाज पढ़कर लौट जाते हैं, लेकिन मरकज में जो जमातें आती हैं, उनमें देश-विदेश के लोग शामिल होते हैं और वे लोग हफ्तों तक यहीं रहते हैं। अगर अभी मरकज खुल गया और यहां कोरोना का कोई मामला निकल आया, तो फिर से सबके निशाने पर मरकज आ जाएगा। इसलिए मरकज प्रबंधन ने इसे बंद रखने का फैसला किया है।

मरकज में कोरोना के मामले सामने आने के बाद ये पूरा इलाका एक छावनी में तब्दील कर दिया गया था। यहां चौबीसों घंटे अर्ध-सैनिक बलों की भारी तैनाती रहती थी। पूरा इलाका सील कर दिया गया था और इस तरफ से गुजरने वाली बसों के रूट तक बदल दिए गए थे। धीरे-धीरे ये सारी पाबंदियां तो हटा ली गईं, लेकिन अब भी लोगों के मन से मरकज का खौफ नहीं गया है।

मरकज के पास ही रुमाल और टोपी बेचने वाले नसीम कहते हैं, ‘हमारा सारा कारोबार ही मरकज के कारण चलता था। मरकज को ऐसे बदनाम किया गया कि अब लोग इस तरफ आने से भी घबरा रहे हैं। हम जब किसी को बताते हैं कि हम निजामुद्दीन मरकज के पास रहते हैं तो लोग हमसे भी दूरी बनाने लगते हैं। काम-धंधा तो लगभग खत्म ही हो गया है। कई लोग अपनी दुकानें हमेशा के लिए बंद करने को मजबूर हो गए हैं।’

इस मरकज के पास ही गालिब अकादमी है जहां देश-विदेश से आने वाले सैलानियों का तांता लगा रहता था। महीनों बंद रहने के बाद अकादमी एक बार फिर से पर्यटकों के लिए खुल तो गई है, लेकिन फिलहाल इसमें भी सन्नाटा ही पसरा मिलता है। पर्यटकों से भरे रहने वाले इस इलाके में फिलहाल सिर्फ स्थानीय लोग या ऐसे ग्राहक ही पहुंच रहे हैं, जो नियमित रूप से यहां आते रहे हैं।

मशहूर होटल गालिब कबाब कॉर्नर के मालिक मोहम्मद नासिर कहते हैं, ‘हम लोगों का काम तो फिर भी अब पटरी पर आने लगा है, क्योंकि हमारे कई ग्राहक तो बंधे हुए हैं। कई ऑनलाइन ऑर्डर कर देते हैं, लेकिन जिन लोगों का धंधा पूरी तरह से पर्यटकों पर ही टिका हुआ है, उनके लिए अभी मुश्किलें कम नहीं हुई हैं।

निजामुद्दीन मरकज, जिसे बंगलेवाली मस्जिद भी कहा जाता है, उस पर आज भी ताले लटके नजर आते हैं। हालांकि, प्रबंधन के लोगों ने इसमें नमाज पढ़ने की व्यवस्था शुरू कर दी है।

पुरानी दिल्ली के बाजारों से लेकर लाजपत नगर और सरोजिनी मगर मार्केट तक में जमकर भीड़ उमड़ रही है। और ये सब ऐसे समय में हो रहा है जब दिल्ली में कोरोना संक्रमण सबसे तेजी से फैल रहा है। बीते रविवार दिल्ली में एक ही दिन में कोरोना के 7,745 नए मामले सामने आए हैं। ये अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। जानकार बताते हैं कि ये कोरोना की थर्ड वेव है, जो बहुत तेजी से फैल रही है।

फोर्टिस सी-डीओसी हॉस्पिटल के चेयरमैन अनूप मिश्रा तो यह तक कह चुके हैं कि दिल्ली में कम से कम एक हफ्ते का आंशिक लॉकडाउन दोबारा लागू कर देना चाहिए, जिसमें तमाम मेट्रो और बस सेवाएं बंद कर दी जाएं। हालांकि, दूसरे जानकार मानते हैं कि पहले ही आर्थिक परेशानियां झेल रहे लोगों के लिए एक बार फिर से लॉकडाउन झेलना मुमकिन नहीं होगा इसलिए संक्रमण की रोकथाम के लिए दूसरे तरीके अपनाने होंगे।



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दुकानदार कहते हैं कि कारोबार मरकज के नाम से चलता था, पर अब लोग आने से कतराते हैं।


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Dainik News Point: दिल्ली के बाजारों में भीड़ उमड़ी, लेकिन मरकज के नाम से लोगों में अब भी कोरोना का खौफ
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