आम आदमी संक्रमण से खुद को बचाए, सरकार मृत्युदर और कम करे

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केरल में हाल ही में ओनम का त्योहार मनाया गया और इस दौरान लोगों का मिलना-जुलना काफी बढ़ गया। सितंबर के बाद से यहां करीब 23 से 25 फीसदी तक इंफेक्शन का रेट बढ़ गया। अब हम सभी को इससे सबक लेना चाहिए। अब पूरे देश में त्योहारों का मौसम शुरू हो गया है। ऐसे में फिजिकल डिस्टेंसिंग (सामाजिक दूरी) बहुत जरूरी है।

इसके पीछे बड़ा कारण यह है कि अब लॉकडाउन नहीं है। अभी तक सरकार के जो अनुमान हैं कि फरवरी के बाद से हम कोरोना वायरस की स्थिति को नियंत्रण में कर सकेंगे, उसके पीछे तर्क यह है कि अभी जिस गति से देश में कोरोना का इंफेक्शन कम हुआ है, यदि ऐसा ही आगे भी चलता रहा, तो फरवरी तक स्थिति नियंत्रण में रहेगी। यानी समिति ने यह माना है कि संक्रमण में जो गिरावट अभी आई है, वैसी ही आगे भी आती रहेगी। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या त्योहारों की भीड़-भाड़ के बीच ऐसा संभव हो सकेगा?

कई देशों में कोरोना की दूसरी लहर

हमें सावधानी के साथ यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि बाकी देशों में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहरें आई हैं। यूरोप, अमेरिका और इजरायल आदि में तो दूसरी लहर पहली लहर से भी कहीं ज्यादा बड़ी रही है। भले ही अब सब जगह कोरोना से होने वाली मौतों की संख्या कम हो रही है, लेकिन इंफेक्शन सभी जगह काफी बढ़ा है। मेरे ख्याल से अभी यह कहना कि फरवरी में कोरोना का संक्रमण कम हो जाएगा, आशावादी होना है।

अभी यह बहुत जरूरी है कि त्योहारों के इन दिनों में हम सतर्कता बिल्कुल न छोड़ें। जिस दर से इंफेक्शन घट रहा है, आने वाले समय में उसी रेट से घटता रहा, तो फरवरी तक हम बहुत बेहतर स्थिति में होंगे। केरल में ओनम के बाद, एक के बाद एक कई सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। इसके बाद वहां संक्रमण तेजी से बढ़ा। अगर केरल की ही तरह, अब पूरे देश में संक्रमण फैलता है तो इससे संकट और ज्यादा बढ़ेगा। ऐसा न हो इसलिए हमें सावधानी बरतना बहुत ज्यादा जरूरी है। क्योंकि अब तक हमने बहुत अच्छे से कोरोना वायरस को हैंडल किया है।

यूरोपियन और लैटिन अमेरिकी देशों की तुलना में हम काफी अच्छे

जैसा कि हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा कि देश में कोरोना से मृत्युदर प्रति दस लाख पर 83 मौत है, जबकि अमेरिका जैसे देशों में यह आंकड़ा प्रति दस लाख लोगों पर 600 मृत्यु के पार है। हम यूरोपियन और लैटिन अमेरिकी देशों की तुलना में बहुत अच्छी स्थिति में हैं। अमेरिका के बाद सबसे अधिक टेस्ट हमारे देश में ही हो रहे हैं। देश में जिस तरह से और जितनी जल्दी कोरोना टेस्टिंग बढ़ाई गई है, यह बहुत सराहनीय काम है।

बहुत बड़ी आबादी है इसलिए ज्यादा संख्या में टेस्टिंग करना बहुत जरूरी है, लेकिन हमारा जैसा हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर था, उसके मुकाबले हमने बेहद तेजी से यह काम किया है। जहां-जहां टेस्टिंग बढ़ाने की जरूरत थी सरकार ने वहां ऐसा किया। अगर टेस्टिंग सही समय पर हो जाती है, तो संक्रमण का इलाज जल्दी शुरू होता है। ऐसे में मृत्युदर भी काफी जल्दी कम हो जाती है। क्योंकि हमें बीमारी के बारे में समय पर पता चल जाता है। जहां टेस्टिंग में देर होती है, वहां फैटेलिटी रेट भी बढ़ जाता है।

देश की अर्थव्यवस्था दोबारा पटरी पर लौटने लगी है

दूसरी तरफ अच्छी बात यह है कि देश की अर्थव्यवस्था दोबारा पटरी पर लौटने लगी है। जब मार्च में सबसे पहला लॉकडाउन हुआ तो अर्थव्यवस्था पर ज्यादा असर पड़ा। इसके बाद तो हर लॉकडाउन लगभग अनलॉक जैसा ही रहा। धीरे-धीरे कई तरह की रियायतें मिलनी शुरू हो गई थीं। अब त्योहारों पर बाजार पूरी तरह खुले हुए हैं, तो इसका असर संक्रमण पर भी पड़ेगा। लेकिन हमारे लिए यही समय संतुलन बनाने का है।

अब हमें इस तरह व्यवहार करना है कि अर्थव्यवस्था भी चलती रहे और कोरोना का संक्रमण भी न बढ़े। एमएसएमई (लघु एवं मध्यम उद्योग) आदि सेक्टर के लिए त्योहारों का समय ही सबसे ज्यादा जरूरी होता है। इसी तरह छोटे-छोटे दुकानदार होते हैं, जिनके लिए यह समय बेहद जरूरी होता है। ऐसे में अगर अब भी हमने दुकान आदि खोलने पर सख्ती की तो बड़ी संख्या में लोग गरीबी रेखा के नीचे चले जाएंगे।

कई ऐसे राज्य हैं जहां कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे थे, लेकिन अब वहां भी नियंत्रित होने लगे हैं। ऐसे में हमें त्योहारों के लिए एक ऐसी रणनीति अपनाने की जरूरत है, जिसमें आम आदमी और सरकार दोनों की ही अपनी-अपनी ज़िम्मेदारी हो। जब चीजें अनलॉक होती हैं, बाजार खोल दिए जाते हैं, तो संक्रमण रोकना मुश्किल हो जाता है।

ऐसे में अब यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम संक्रमण रोकें। बाजारों में मास्क लगाकर जाएं और दूसरों से दूरी बनाकर रखें। वहीं सरकार को चूंकि अब समय मिल गया है, इसलिए उसकी तैयारी पूरी है। वो कोरोना के संक्रमण को समझ चुकी है, तो डेथ रेट को और कम करने पर जोर दे। अगर आम आदमी और सरकार दोनों अपना काम जागरूकता और मुस्तैदी के साथ करते हैं तो हमारी तैयारी ऐसी है कि हम त्योहारों में भी अच्छे से कोरोना के संक्रमण को नियंत्रित कर सकते हैं। (ये लेखिका के अपने विचार हैं)



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शमिका रवि, प्रधानमंत्री की इकोनॉमिक एडवाइजरी काउंसिल की पूर्व सदस्य


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